हम सभी के साथ ऐसा होता होगा कि दिन भर नींद आती रहेगी, office में कुर्सी पर झपकी लेने का मन करता है, मीटिंग्स में आंखें भारी हो जाती हैं, लेकिन जैसे ही रात को बिस्तर पर लेटते हैं, नींद गायब। आंखें थक चुकी होती हैं, पलकें भारी लगती हैं, फिर भी नींद का कहीं नामोनिशान नहीं। कुछ बातें अंदर ही अंदर परेशान करती रहती हैं, जैसे कोई अदृश्य तीर दिल को चुभता रहता हो।


