आज सामने के बैंक्वेट हॉल में प्रोग्राम में जोर जोर से माइक में रिश्तेदार आ आ कर कुछ न कुछ अच्छी बातें कर रहे थे, उस जोड़े के लिए जिन की शादी कि सालगिरा है, तो मेरे साथ बैठे मेरे सीनियर सर ने जो कहा उसे सुन कर मुझे अचानक लगा कि इसे जल्द से जल्द लिख लेता हूँ, काफी सीधी पर बड़ी बात है, बस नजरिये का खेल है...
जन्म दिन हो, सालगिरा हो, सभी के लिए अब हॉल बुक हो रहे
हैं, और उनमे फिल्मों की तरह प्रोग्राम
कर के रिश्तों को साबित किया जा रहा है, लोगों को बताया जा रहा है कि हमारे रिश्ते
में कितनी मिठास है, चार दिवारी
में जो भी हो, जैसा भी हो, प्यार हो या नही पर उस दिन के लिए तैयारी की जाती है, कौन सी ड्रेस पहननी है, कौन से गाने में डांस करना है, कौन का
बैंक्वेट हॉल बुक करे, कौन कौन सी
खाने की डिश रखनी है...
सब पैसे का खेल है, प्यार को पैसे
से ही जाहिर किया जा सकता है...
- बाबा बेरोजगार

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