“सब ने मुझे जन्मदिन की बधाई दी, पर तुमने नहीं? पहले तो सबसे पहले तुम ही विश करते थे, क्यूँ जन्मदिन भूल गये ना?” उसने मुझे हल्के गुस्से भरे अंदाज में पूछा...
“क्या फर्क पड़ता है अब, जब हक़ ही पहला नहीं रहा तो” बात को ख़त्म करने के लिए ये कह कर शांत हो गया था मैं...
“पर अभी तक भी तुमने विश नहीं किया है, अब तो कर लो...” उसने थोडा सा लहजा बदल कर कहा, ताकि बात आगे चले...
“कुछ फर्क पड़ता है क्या” (फिर से सन्नाटा...)
“अरे... ये क्या बात हुई, विश तो कर लो, तुम्हारे विश किये बिना ये ख़ुशी पूरी नहीं होगी”
उसके चेहरे को कुछ देर देखेते हुए पुरानी यादों की नाव में बैठ कर काफी दूर तक सफ़र पर निकल गया, कैसे उसे सबसे पहले विश करने और उससे बातें करने को दिल बेताब रहता था... दिल को सुकून उसकी आवाज सुन कर ही मिलता था... चाहे कैसा भी मूड हो, कितना भी टेंशन हो... उसके एक हलकी सी आवाज में “हाई” बोलने से मानो अन्दर उठ रहा तूफ़ान शांत हो जाता था, उसकी आवाज एक मैडिटेशन म्यूजिक की तरह काम करती थी... पर.... अब...
उसके चहरे को देखते हुए कहना पड़ा “हाँ ठीक है, Happy Birth Day, चलो तुम्हे लेट हो रहा होगा, बाय, ख्याल रखना अपना”
उसने भी हाँ में सर हिलाया और एक हलकी सी मुस्कान के साथ “तुम भी” कहा, और हलके क़दमों से चल पड़ी, और मैं उसे बस खुद से दूर जाते देखता रहा... फिर से.....
- बाबा बेरोजगार

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